गोरखपुर :- (मानव दर्पण न्यूज़ रिपोर्ट : संपादक: डॉ.. अजय कुमार मित्रा )
*कैसे बने नई उम्मीद:*
*1. जमीनी आंदोलन से*
8 अगस्त 2019 को गोरखपुर में अम्बेडकर जन मोर्चा का गठन किया।
– 12 जनवरी 2020 को गोरखपुर में “दलित, पिछड़ा शिक्षा, छात्रवृत्ति बचाओ रैली” की। इसमें 50 हजार से ज्यादा छात्र-नौजवान शामिल हुए, जिसके बाद UP सरकार ने लाखों छात्रों की छात्रवृत्ति जारी की।
– 17 दिसंबर 2022 को गोरखपुर में “दलित अधिकार रैली” की, जिसमें करीब 1 लाख लोग भूमिहीनों को प्रति परिवार 1 एकड़ जमीन की मांग पर जुटे।
*2. भूमिहीनों की लड़ाई*
दलित, पिछड़ा, मुस्लिम भूमिहीन गरीब परिवारों को 1-1 एकड़ जमीन दिलाने की मांग को लेकर 3 साल से आंदोलन चला रहे हैं। 10 अक्टूबर को गोरखपुर कमिश्नर कार्यालय पर “डेरा डालो-घेरा डालो” आंदोलन के बाद उन्हें और अन्य नेताओं को हिरासत में ले लिया गया था, महीनों गोरखपुर जेल मे बन्द किया था सरकार ने लेकिन निराला संघर्ष से पीछे नही हटे, आज भी संघर्ष जारी है
*3. संगठनात्मक पकड़*
20-22 साल से लगातार सामाजिक-राजनीतिक गतिविधियों में हैं।
– छात्र-युवाओं पर मजबूत पकड़ मानी जाती है।
– अम्बेडकर जन मोर्चा की टीम अब पूर्वांचल के हर मंडल, जिला, तहसील, ब्लॉक और गांव तक बन चुकी है।
– बुद्धिजीवियों की टीम भी साथ काम कर रही है।
*4. दलितों का भरोसा*
पूर्वांचल के दलित समाज में यह भावना बढ़ी है कि “अब अपना नेतृत्व खुद खड़ा करना है”। अम्बेडकर जन मोर्चा का तेजी से खड़ा होना ही इस सवाल का जवाब माना जा रहा है कि पूर्वांचल में दलितों का नया नेतृत्वकर्ता कोई नही था निराला ने खाली जगह भर दिया है।
*संदर्भ:* पूर्वांचल में दलित-पिछड़ा समाज महसूस कर रहा है कि पश्चिमी UP के नेता उनके मुद्दे नहीं उठाते। इसलिए वे अपने बीच से निकले युवा नेतृत्व को आगे बढ़ा रहे हैं। श्रवण कुमार निराला की विश्वसनीयता और संगठनात्मक अनुभव इस वजह से उन्हें उम्मीद की तरह देखे जाने की वजह बनी।












