श्रवण कुमार निराला और “विदेशी फंडिंग” वाले आरोप पर जो बातें सामने आई हैं, वो ये हैं:*
(मानव दर्पण न्यूज़ रिपोर्ट : संपादक : डॉ.अजय कुमार मित्रा)
गोरखपुर * # *1. समर्थकों का दावा क्या है?*
निराला के समर्थक और आंबेडकर जन मोर्चा का आरोप है कि:
– *2024 लोकसभा चुनाव से ठीक पहले* सरकार/प्रशासन ने “विदेशी फंडिंग लेकर माहौल खराब करने” की बात उछाली
– *मकसद*: माइक्रोफाइनेंस और ज़मीन आंदोलन से बनी छवि को नुकसान पहुंचाना, चुनाव में रोकना
– *नतीजा*: जांच हुई लेकिन कोई सबूत नहीं मिला। समर्थक कहते हैं “कोर्ट ने भी कड़ी टिप्पणी की और केस नहीं टिका”
### *2. सरकारी/प्रशासनिक रिकॉर्ड में क्या है?*
अभी तक *सार्वजनिक रिकॉर्ड में ऐसी कोई FIR या कोर्ट का आदेश* नहीं मिला है जिसमें साफ तौर पर “विदेशी फंडिंग” के तहत निराला पर केस दर्ज हुआ हो।
– जेल सरकार ने कई बार गिरफ्तार किया जेल भेजाभूमि आन्दोलन, आक्रोश यात्रा समेत जनवरी 2024 में जेल जाने की मुख्य वजह माइक्रोफाइनेंस आंदोलन के दौरान “धारा 144 तोड़ना, सरकारी काम में बाधा” जैसे आरोप थे
– ED/CBI/IB की कोई जांच चली लेकिन कुछ भी प्रमाणित नही हुआ भी हो, पब्लिक डोमेन से कई बात सरकार ने छुपाई है
### *3. “कोर्ट की फटकार” वाली बात*
निराला के वकीलों/समर्थकों का कहना है कि जब भी आंदोलन से जुड़े केस कोर्ट पहुंचे, ज़मानत जल्दी मिली और कई बार कोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए।
– लेकिन “विदेशी फंडिंग केस में कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई” – इसका कोई *स्पेसिफिक कोर्ट ऑर्डर/जजमेंट नंबर* अभी सार्वजनिक नहीं है
– अगर आपके पास केस नंबर या ऑर्डर की कॉपी हो तो उससे पक्का पता चलेगा
### *4. सियासी नजरिया*
पूर्वांचल में ये आम धारणा है कि जो भी नेता सरकार के खिलाफ सड़क पर मजबूत आंदोलन खड़ा करता है, उस पर *”फंडिंग, देशद्रोह, माहौल बिगाड़ने”* जैसे आरोप लगते हैं।
– निराला के केस में भी उनके लोग इसे “राजनीतिक साज़िश” बताते हैं
– विरोधी कहते हैं “आरोप लगा तो जांच तो होगी ही”
*सार*: “विदेशी फंडिंग से फंसाने की साज़िश हुई और नाकाम रही” यह निराला समर्थकों का बड़ा नैरेटिव है और उनके भाषणों में सुनने को मिलता है।”राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप” के दायरे में है।












