उठी आवाज; “माननीयों का भविष्य सुरक्षित तो कर्मचारियों के घर का चूल्हा क्यों नहीं?”
(एम डी न्यूज़ रिपोर्ट : संपादक : डॉ.अजय कुमार मित्रा )
#लखनऊ। पुरानी पेंशन बहाली, निजीकरण समाप्त करने और शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से राहत देने की मांग को लेकर शुक्रवार को लखनऊ के ईको गार्डन में अटेवा-एनएमओपीएस की प्रदेश स्तरीय महारैली में शिक्षक-कर्मचारियों का बड़ा जमावड़ा हुआ। भारी बारिश के बावजूद प्रदर्शनकारी डटे रहे। रैली में पुरानी पेंशन को सामाजिक सुरक्षा का आधार बताते हुए सरकार से तत्काल निर्णय की मांग उठाई गई। विजय कुमार बंधु की हुंकार ने पूरे आंदोलन को धार दी। उन्होंने बारिश के बीच जुटे शिक्षक-कर्मचारियों की भावना को सरकार तक पहुंचाने और पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग प्रमुखता से उठाई। उन्नाव की भागीदारी इस शक्ति प्रदर्शन का प्रमुख केंद्र रही। इस जनपद से करीब एक हजार शिक्षक बसों और निजी वाहनों से ईको गार्डन पहुंचे। अटेवा उन्नाव संयोजक अर्पित मिश्र, संजीव संखवार, कृष्ण शंकर मिश्र आदि ने जिले की भागीदारी को नेतृत्व दिया।
जूनियर शिक्षक संघ के संजय कनौजिया तथा प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन (PSPSA) के जिलाध्यक्ष संजीव संखवार, मंत्री प्रदीप वर्मा, जिला कोषाध्यक्ष अमित तिवारी सहित हजारों शिक्षक मौजूद रहे। PSPSA की प्रांतीय कार्यकारिणी से प्रदेश अध्यक्ष विनय सिंह, महामंत्री आशुतोष मिश्र, पंकज यादव, महेंद्र मिश्र और दिनेश कुमार भी धरने में पहुंचे।
ईको गार्डन के आसपास के क्षेत्रों में भी भीड़ का व्यापक असर दिखाई दिया। आलमबाग से कैंट तक यातायात प्रभावित होने जैसी स्थिति बनी। धरने की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर तेजी से प्रसारित हुए और आंदोलन की गूंज डिजिटल मंचों पर भी दिखाई दी। सबसे मार्मिक दृश्य सोनभद्र से पहुंचे दोनों पैरों से दिव्यांग कर्मचारी का रहा। उनका कहना था, “भगवान ने मुझे अपाहिज बनाया, लेकिन शिक्षक बनकर परिवार पाल रहा हूं। सरकार कर्मचारियों को विकलांग बनाकर उनकी बैसाखी तक छीन रही है।”
संजीव संखवार ने पुरानी पेंशन को कर्मचारियों के सुरक्षित बुढ़ापे का आधार बताया। अर्पित मिश्र ने शिक्षक-कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा को गंभीरता से लेने की मांग की। महिला शिक्षिका रीता कुशवाहा ने सवाल उठाया कि जब माननीयों की आने वाली पीढ़ियों तक का भविष्य सुरक्षित है, तो कर्मचारियों के घर के चूल्हे की चिंता क्यों नहीं? धरने में राजकरण, रीता कुशवाहा, नरेंद्र सिंह, राजू, पुलकित, सुरेंद्र कनौजिया, सूफियान, उपेंद्र, प्रदीप यादव, सुरेंद्र प्रकाश, राजबहादुर, अंजू, पवन, अनूप, दिलीप, कल्पना और कौशल समेत बड़ी संख्या में शिक्षक-कर्मचारी शामिल रहे। मूसलाधार बारिश के बीच ईको गार्डन में जमा भीड़ ने पेंशन के मुद्दे को राजधानी के सार्वजनिक विमर्श में फिर मजबूती से ला खड़ा किया।












