लखीमपुर खीरी। (रिपोर्ट : धर्मवीर सवाददाता लखीमपुर )
शारदानगर वन रेंज की फूलबेहड़ चौकी क्षेत्र में आंधी-तूफान के दौरान गिरे सरकारी पेड़ों की लकड़ी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप है कि आंधी में गिरे पेड़ों की लकड़ी को वन विभाग की निगरानी में सुरक्षित रखने के बजाय कथित रूप से रातों-रात कटवाकर बाहर भेज दिया गया।सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कथित तौर पर कुछ लकड़ी ठेकेदारों के माध्यम से सरकारी लकड़ी को काटकर लहरपुर मंडी भेजे जाने की बात सामने आई है। इस मामले में डिप्टी रेंजर संजय आजाद कुमार तथा कर्मचारियों रामगोपाल और कल्लू गोस्वामी की भूमिका को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।बताया जा रहा है कि विक्रम नामक लकड़ी ठेकेदार के माध्यम से कथित रूप से लकड़ी को रात में ट्रॉली से बाहर भेजा गया। सूत्रों का दावा है कि लकड़ी को लहरपुर मंडी में बिक्री के लिए भेजा गया। इस संबंध में रात के समय लकड़ी ले जाने का एक वीडियो भी सामने आने की बात कही जा रही है, जिसकी सत्यता और उसमें दिखाई दे रही लकड़ी की पहचान जांच का विषय है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि वन क्षेत्र में आंधी से गिरने वाले सरकारी पेड़ों की लकड़ी के निस्तारण और अभिलेखीय प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है। यदि बिना अनुमति अथवा निर्धारित प्रक्रिया के सरकारी लकड़ी को काटकर बाहर भेजा गया है तो यह गंभीर जांच का विषय हो सकता है।मामले को लेकर वन विभाग के संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने उच्चाधिकारियों से मांग की है कि मौके पर उपलब्ध लकड़ी, कटे हुए पेड़ों की संख्या, संबंधित अभिलेख तथा लकड़ी के परिवहन से जुड़े दस्तावेजों की जांच कराई जाए।
अब देखना यह है कि उच्चाधिकारी मामले का संज्ञान लेकर स्थलीय जांच और निष्पक्ष जांच कराते हैं या नहीं। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि आंधी में गिरे सरकारी पेड़ों की लकड़ी कहां गई और उसे किस प्रक्रिया के तहत बाहर भेजा गया।












